मुगल सम्राट औरंगजेब (Aurangzeb) भारतीय इतिहास के सबसे विवादित शासकों में से एक थे। उनका शासनकाल 1658 से 1707 तक चला। वह शाहजहाँ के पुत्र और मुग़ल साम्राज्य के छठे शासक थे। उनके शासनकाल को कट्टरता, साम्राज्य विस्तार और धार्मिक नीतियों के कारण याद किया जाता है।
प्रारंभिक जीवन और सत्ता संघर्ष
औरंगजेब का जन्म 3 नवंबर 1618 को हुआ था। उन्होंने अपने भाइयों दारा शिकोह, शाह शुजा और मुराद बख्श को पराजित कर 1658 में सत्ता हासिल की। उनके पिता शाहजहाँ को आगरा किले में कैद कर दिया गया था। सत्ता पर काबिज होने के बाद, उन्होंने अपने शासन को मजबूत किया और दक्षिण भारत की ओर अपना ध्यान केंद्रित किया।
शासनकाल की प्रमुख विशेषताएँ
- साम्राज्य विस्तार: औरंगजेब ने दक्कन में बीजापुर, गोलकुंडा और मराठा क्षेत्र को जीतने का प्रयास किया। उन्होंने 27 वर्षों तक मराठों से युद्ध किया।
- धार्मिक नीतियाँ: उन्होंने जज़िया कर (Jizya Tax) फिर से लागू किया और कई हिंदू मंदिरों को ध्वस्त किया।
- कानूनी सुधार: उन्होंने इस्लामिक शरिया कानून को कठोरता से लागू किया और कई प्रशासनिक सुधार किए।
- आर्थिक स्थिति: दक्षिण में लंबे युद्धों के कारण मुग़ल खज़ाना खाली हो गया और आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया।
बुढ़ापा और अंतिम समय
औरंगजेब ने अपने जीवन के अंतिम तीन दशक दक्षिण भारत में बिताए। उन्होंने कई युद्धों का नेतृत्व किया, लेकिन वृद्धावस्था में उन्हें अकेलापन और असफलता का सामना करना पड़ा। उनके बेटे सक्षम उत्तराधिकारी नहीं थे, जिससे मुगल साम्राज्य कमजोर हो गया।
मृत्यु और मुग़ल साम्राज्य का पतन
औरंगजेब की मृत्यु 3 मार्च 1707 को अहमदनगर में हुई। उनकी मृत्यु के बाद मुग़ल साम्राज्य धीरे-धीरे पतन की ओर बढ़ा। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद बहादुर शाह ज़फ़र के नेतृत्व में मुग़ल साम्राज्य का अंत हुआ।
निष्कर्ष
औरंगजेब का शासनकाल भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वह एक कुशल सेनानायक और कठोर प्रशासक थे, लेकिन उनकी धार्मिक नीतियों और दीर्घकालिक युद्धों ने मुग़ल साम्राज्य की नींव को कमजोर कर दिया। उनकी मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य का प्रभाव तेजी से घटता चला गया।
(ये आर्टिकल में सामान्य जानकारी आपको दी गई है अगर आपको किसी भी उपाय को apply करना है तो कृपया Expert की सलाह अवश्य लें) RRR
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